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इसी पल में है जीवन..
जी लो इसी को..
गुज़रा हुआ पल आता नहीं है।
ज़िन्दगी ही जीती है फिर उसको, 
जो ज़िन्दगी को जीता नहीं है।
महज़ चंद साँसो का फेरा है सारा,
दर पर खुदा के कोई किसी का नहीं है !
तेरे सद्कर्म ही तेरे साथ,
रहेंगें सदा,
ये दुनियाँ तो इक रैन बसेरा है।
पल में बदल जाता आलम यहाँ पर,
कल जहाँ... महल था,
आज मलबे का... ढेरा है !
मोहब्बत करले बंदे तू उस खुदा से,
इस दुनियाँ जो... कुशल चितेरा है।
इसी पल में है जीवन..
जी लो इसी को..
गुज़रा हुआ पल आता नहीं है।
____राधा श्रोत्रिय"आशा"
22_01_2017

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